Sharing from Alifiya Sabir:
इस देश को आदत हो चुकी है मक्कारी, घोटाले और चोरी की. सियासत एक ऐसी गटर है जहा बरसो से वही गंदगी फैली हुई है. लेकिन एक मसीहे के रूप में इंसान ने आने की बोहोत कोशिश की. उसको हर तरह से नीचा दिखाकर, बुरा साबित कर कर, लोगो के दिमाग में उसके खिलाफ गलत सलत बाते फैला कर, उसे पाकिस्तान का, कभी कॉंग्रेस का एजेंट, कभी आइटम गर्ल, कभी क्राइ बेबी बोला गया. लाखो क्रॉरो रुपैये से मीडीया, फोन सर्वीसज़, सोशियल नेटवर्क्स सबको खरीदकर लोगो के दिमाग में कीड़ा भर दिया. क्या कोई भी उस बंदे की सूरत और सीरत नहीं जान सका ?
इस देश को आदत हो चुकी है मक्कारी, घोटाले और चोरी की. सियासत एक ऐसी गटर है जहा बरसो से वही गंदगी फैली हुई है. लेकिन एक मसीहे के रूप में इंसान ने आने की बोहोत कोशिश की. उसको हर तरह से नीचा दिखाकर, बुरा साबित कर कर, लोगो के दिमाग में उसके खिलाफ गलत सलत बाते फैला कर, उसे पाकिस्तान का, कभी कॉंग्रेस का एजेंट, कभी आइटम गर्ल, कभी क्राइ बेबी बोला गया. लाखो क्रॉरो रुपैये से मीडीया, फोन सर्वीसज़, सोशियल नेटवर्क्स सबको खरीदकर लोगो के दिमाग में कीड़ा भर दिया. क्या कोई भी उस बंदे की सूरत और सीरत नहीं जान सका ?
काश इस आदमी के खिलाफ भी कोई क्रिमिनल रेकॉर्ड होता या वो अनपढ़ गवार होता, तो उसे भी सब स्वीकार लेते.
लेकिन अब भी कही उम्मीद कायम है. शायद कुछ चमत्कार हो जाये. आज तक हिंदुस्तान की नय्या वैसे भी उम्मीद पर ही टिकी रही है, अब भी सिर्फ उम्मीद कर सकते है..यह मत समझना, की मेरे तुम्हारे अकेले के कुछ सोचने या करने से क्या होगा. फर्क पढ़ता है. एक कीड़ा भी इस दुनिया को कुछ देकर ही जाता है और हम तो इंसान है. काफी कुछ करने की क्षमता रखते है..
जै हिंद.
लेकिन अब भी कही उम्मीद कायम है. शायद कुछ चमत्कार हो जाये. आज तक हिंदुस्तान की नय्या वैसे भी उम्मीद पर ही टिकी रही है, अब भी सिर्फ उम्मीद कर सकते है..यह मत समझना, की मेरे तुम्हारे अकेले के कुछ सोचने या करने से क्या होगा. फर्क पढ़ता है. एक कीड़ा भी इस दुनिया को कुछ देकर ही जाता है और हम तो इंसान है. काफी कुछ करने की क्षमता रखते है..
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